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Editorial | 10-Nov-2016 01:28:58 AM
नरेन्द्र मोदी का नया लक्ष्यभेदी प्रहार


श्‍याम कुमार
श्‍याम कुमार
(वरिष्‍ठ पत्रकार)

दि राइजिंग न्‍यूज

आश्‍चर्य होता है कि सत्तर वर्षों से हमारा जो देश एक पिछड़ा हुआ देश बना हुआ था तथा विश्‍व में उसकी छवि कमजोर राष्‍ट्र की मानी जा रही थी, वही देश विगत मात्र ढाई वर्षों की अवधि में एक सशक्त राष्‍ट्र का रूप ले चुका है। भले ही उसे विश्‍व की महाशक्ति बनने में अभी पर्याप्त समय लगेगा, किन्तु उपमहाशक्ति के रूप में तो उसे सम्मान प्राप्त हो ही गया है। रूस, अमरीका, जापान आदि जैसे बड़े देश उसे हीन समझकर नहीं, बराबरी के स्तर पर मानकर बात करते हैं। इस बात का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को है। मोदी का व्यक्तित्व इतना विराट है कि उसमें कूटनीति-विषेशज्ञ चाणक्य की छवि देखी जा सकती है। वह एक तीर से कई निशाने साधने में सिद्धहस्त हैं। अभी उन्होंने पठानकोट पर पाकिस्तानी हमले के बाद जो लक्ष्यभेदी प्रहार(सर्जिकल स्ट्राइक) किया था, उसकी चर्चा समाप्त भी नहीं हो पाई थी कि उन्होंने नया लक्ष्यभेदी प्रहार कर दिखाया है। पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों का प्रचलन अचानक समाप्त कर उन्होंने देश के इतिहास को नया मोड़ दे दिया है। मोदी-सरकार की इस बात के लिए भी प्रशंसा की जानी चाहिए कि पिछले छह महीने से जिस प्रहार की तैयारी की जा रही थी, उसकी किसी को भनक भी नहीं मिल पाई। गत दिवस जब प्रधानमंत्री ने तीनों सेनाध्यक्षों के साथ बैठक की, जिसके बाद मंत्रिपरिषद की बैठक हुई और फिर प्रधानमंत्री राष्‍ट्रपति भवन जाकर राष्‍ट्रपति से मिले, उससे यह अनुमान लगाया जा रहा था कि पाकिस्तान के विरुद्ध कोई कड़ी कार्रवाई होने जा रही है। किन्तु वह कार्रवाई जिस रूप में सामने आई, उससे पूरा देष आशचर्यचकित हो गया।    

   

पांच सौ एवं एक हजार के नोटों को रद्द करने की मांग बाबा रामदेव विगत लगभग एक दशक से कर रहे थे। उनका कहना था कि ऐसा होने पर काले धन पर अपने आप अंकुश लग जाएगा। दस वर्षीय मनमोहन/सोनिया सरकार में तो ऐसा होने का प्रश्‍न नहीं था। कारण यह कि देष की अर्थव्यवस्था को काले धन के हवाले करने का सबसे बड़ा श्रेय कांग्रेसी शासन एवं नेहरू वंश को है। वे दोनों एक प्रकार से काले धन के सबसे बड़े संरक्षक थे। लेकिन बाबा रामदेव अपने अभियान में निरंतर लगे हुए थे और हर जनसमागम में वह पांच सौ एवं एक हजार के नोटों को रद्द करने की मांग कर रहे थे। इस समय बाबा रामदेव को भी यह कल्पना नहीं रही होगी कि अचानक उनकी वह मांग नरेंद्र मोदी पूरी कर दिखाएंगे। रिजर्व बैंक शीघ्र ही दो हजार रुपये एवं पांच सौ रुपये वाले नए नोट जारी करने जा रहा है। मोदी सरकार का जो नया निर्णय हुआ है, उससे कुछ दिनों तक बहुत अफरा-तफरी रहेगी। ऐसा निर्णय कभी भी होता तो अफरा-तफरी की वह स्थिति झेलनी पड़ती। चूंकि निर्णय देशहित में है, इसलिए देश उस कष्‍ट को भूलकर उसका भारी स्वागत कर रहा है। मोदी सरकार ने अपने निर्णय से जनता का दिल जीत लिया है और वह देश पर छा गई है।           


जब से मोदी सरकार अस्तित्व में आई है, मोदी-विरोधी तबका गला फाड़-फाड़कर चिल्ला रहा था कि मोदी झूठे हैं और उन्होंने काला धन वापस लाने का अपना वादा पूरा नहीं किया है। इनमें अग्रणी कांग्रेस पार्टी एवं नेहरू वंश के लोग थे। वे तो वैसे भी इस बात में माहिर हैं कि अपने कुकृत्यों पर परदा डालकर मोदी सरकार पर झूठे आरोप लगाते रहें। इसका नमूना गत दिवस उस समय पुनः सामने आया, जब देषविरोधी रिपोर्टिंग करने पर एनडीटीवी एवं दो अन्य चैनलों पर नियामक आयोग ने 24 घंटे के लिए रोक लगाने का आदेश दिया। इस पर राहुल गांधी एवं कांग्रेस के अन्य नेता धरना-प्रदर्षन एवं वक्तव्यों द्वारा मोदी सरकार पर आरोप लगा रहे थे कि वह प्रेस का गला घोंट रही है। वे यह भूल गए थे कि इंदिरा गांधी ने अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए देश को इमरजेंसी की आग में झोंककर तरह-तरह के जो अत्याचार किए थे, उनमें प्रेस का बुरी तरह गला घोंटने का कुकर्म भी शामिल था। इसी प्रकार आजादी के बाद अब तक काले धन को संरक्षण एवं प्रोत्साहन देने वाली कांग्रेस पार्टी व उसके मुखिया राहुल गांधी आरोप लगा रहे थे कि नरेंद्र मोदी विदेशों से काला धन अब तक वापस नहीं लाए हैं। यहां भी वास्तविकता यह है कि मनमोहन/सोनिया सरकार वर्ष 2014 में सत्ता से विदा होने से पूर्व ऐसे कुचक्र रच गई थी कि विदेशों से काला धन आसानी से वापस न आ सके। यह भी तथ्य था कि जिन लोगों ने विदेशों में अपना काला धन जमा कर रखा था, मोदी सरकार के सत्तासीन होते ही उन्होंने तुरंत वह काला धन वहां से हटाकर कहीं अन्यत्र ठिकाने लगा दिया था।


विदेशों से अधिक काला धन हमारे देश में जमा है और वह पूरी अर्थव्यवस्था के समानांतर काम कर रहा है। विगत एक वर्ष से मोदी सरकार उस आंतरिक काले धन को बाहर निकालने के लिए  तरह-तरह से प्रयासरत थी। उसने काला धन जमा करने वालों को अपने काले धन का खुलासा करने का पर्याप्त अवसर प्रदान किया। जब उस छूट की 30 सितम्बर की अंतिम तिथि समाप्त होने लगी, तभी प्रधानमंत्री मोदी एवं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बार-बार घोषणा की थी कि छूट की तारीख अब नहीं बढ़ाई जाएगी तथा 30 सितम्बर के बाद कठोर कदम उठाए जाएंगे। मोदी सरकार ने अपनी बात सही सिद्ध कर दी। इस समय पूरा देश मोदी सरकार के कदम से बेहद खुश है, लेकिन उन लोगों के चेहरे मुरदा हो गए हैं, जो मोदी सरकार पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे थे। मोदी के उन विरोधियों का अस्तित्व काले धन पर ही टिका हुआ था।

उत्तर प्रदेश का चुनाव सामने है, जिसके लिए अनेक राजनीतिक दलों एवं नेताओं ने काले धन का जमकर इस्तेमाल करने की योजनाएं बना रखी थीं। अब उनके लिए अचानक यह स्थिति हो गई है, तेरा क्या होगा कालिया?

 

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