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Editorial | 4-Nov-2016 10:54:21 AM
अखिलेश की रथयात्रा से एकता के दावे की परख



 

दि राइजिंग न्‍यूज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बहुप्रचारित रथयात्रा सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) में जारी खींचतान पर विराम लगा पाएगी, इस पर संदेह अब भी बना हुआ है। इस रथयात्रा से सपा में एकता के दावों की वास्तविकता भी सामने आ जाएगी। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के इस रथयात्रा में शरीक होने पर अनिश्चितता की स्थिति तो समाप्‍त हो गई है लेकिन, रथयात्रा के आरंभ में ही मंच पर तल्‍खी सामने दिखने लगी थी। 


वहीं, अखिलेश के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखे जा रहे उनके चाचा सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने भी मुख्यमंत्री की विकास रथयात्रा में भारी मन से शिरकत तो की लेकिन उनकी शुभकामना में भी तल्‍खी साफ झलक रही थी। जबकि अखिलेश ने मंच से उनका नाम न लेकर अपना इरादा साफ कर दिया है। अब भी सबकी निगाहें सपा मुखिया मुलायम और उनके अनुज शिवपाल पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री की पूरी विकास रथयात्रा में उनकी मौजूदगी या गैरहाजिरी विधानसभा चुनाव से पहले सपा में एकजुटता की स्थिति साफ कर देगी।


शिवपाल ने रथ यात्रा के दौरान ही अखिलेश की रथयात्रा में हिस्सा लेने संबंधी सवालों को टालते हुए कहा था कि मैं अभी तो पांच नवंबर को सपा के रजत जयंती समारोह की तैयारियां कर रहा हूं। शिवपाल ने कहा था कि चिल्‍लाने वाले लोगों को और युवा कार्यकर्ताओं को समाजवाद का इतिहास पढ़ना चाहिए। पार्टी में अनुशासन होना बहुत जरूरी है। उनकी तल्‍खी आज भी इस बात पर टिकी है कि 24 अक्तूबर को (बवाल वाले दिन) देखा कि जिन लोगों को बैठक में नहीं बुलाया गया था, वे भी उसमें चले आए। ऐसे में अनुशासनहीनता तो टूटती ही है। 


इसका सीधा उत्‍तर रथयात्रा के उद्घाटन के दौरान सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने दिया। अखिलेश.. अखिलेश का नारा लगाने वालों को उन्‍होंने डपटा था कि, भइया.. भइया चिल्‍लाने से वोट नहीं गिरता है। जीतना है तो विजय से विकास की ओर जाना होगा। मुलायम ने मंच्‍ से तल्‍खी के साथ कहा था कि मुख्‍यमंत्री जी विकास से विजय की ओर जाना चाहते हैं पर ऐसा नहीं होता है। उनको विजय से विकास की ओर जाना चाहिए।


इस बीच, सपा मुखिया के अखिलेश की विकास से विजय तक रथयात्रा में शामिल होने के बद एउकता पर उठे संदेह के बादल तो छंट गए हैं लेकिन इस बात को लेकर लेकर संदेह बना हुआ है कि क्‍या अखिलेश की रथयात्रा में प्रदेश अध्‍यक्ष के तौर पर शिवपाल सिंह यादव की कोई भूमिका होगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो यकीनन सपा की स्थिति बहुत अच्‍छी नहीं मतानी जा सकती है। हालांकि रथयात्रा की तैयारियों की जिम्मेदारी संभाल रहे विधान परिषद सदस्य सुनील यादव दावा कर रहे हैं कि नेता जी द्वारा रथयात्रा को झंडी दिखाकर रवाना करने से सब कुछ संभल गया है पर रथयात्रा के दौरान अखिलेश यादव का यह कहना कि विवाद से देरी हो गई और हम कुछ पीछे हो गए हैं... दूसरी कहनी को बयां करता है। 


उधर सपा के ही एक वरिष्‍ठ नेता का यह कहना मायने रखता है कि रथयात्रा में मुलायम की शिरकत इस बात पर निर्भर थी कि वह अपने पिता को मनाने में किस हद तक कामयाब हो पाते हैं पर मंच पर मुलायम और शिवपाल को देखकर कतई ऐसा नहीं लगा कि, वे दोनों बहुत खुश हैं।


अखिलेश यादव के करीबी बताए जाने वाले सपा से निष्कासित विधान परिषद सदस्य सुनील यादव साजन इस बात से खुश हैं कि उन्‍होंन भीड़ जुटाकर बताया है कि रथयात्रा की तैयारियां पूरी हैं। रथयात्रा के पहले चरण के प्रभारी साजन बताते हैं कि, रथयात्रा के दौरान हर दो किलोमीटर पर मुख्यमंत्री का स्वागत किया जाएगा। वह विभिन्न स्थानों पर जनता को संबोधित भी करेंगे। मुख्यमंत्री के काफिले में पांच हजार से ज्यादा वाहन शामिल होंगे। 


इस दौरान यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि अखिलेश ही सपा का सर्वस्वीकार्य चेहरा हैं। लखनऊ से उन्नाव के बीच अखिलेश की रथयात्रा के 60 किलोमीटर से ज्यादा लंबे रास्ते पर दोनों ओर बैनर और पोस्टरों की भरमार तो रही है पर उसमें कहीं पर परिवार के दूसरे लोग शामिल नहीं हैं। रथ पर भी सपा प्रमुख को मजबूरी में पीछे की ओर जगह मिली हैं।


सपा कुनबे की एकता की मिसाल देने से पहले अखिलेश और शिवपाल की आपसी तल्खी जगजाहिर होने के बीच एक होर्डिंग में लिखा गया है- शिवपाल कहें दिल से, अखिलेश का अभिषेक फिर से। वहीं, कई अन्य होर्डिंग और बैनरों पर अखिलेश सरकार के कार्यों की तारीफ की गई है। बैनर-होर्डिंग्स यह दिखाते हैं कि पार्टी में भ्रम की स्थिति है। यह सड़कों पर भी दिखाई दे रही है। भ्रम रथयात्रा की शुरुआत के साथ ही बढ़ गया है। अखिलेश की रथयात्रा के साथ-साथ सपा पार्टी के स्थापना की 25वीं सालगिरह मनाने की तैयारियों में भी जुटी है।


उसकी कोशिश अपने मंच पर समाजवादियों और चरणसिंहवादियों की जमात इकट्ठा कर व्यापक संदेश देने की है। इसके लिए सपा मुखिया मुलायम और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल ने पिछले सप्ताह जद (एकी) के नेता केसी त्यागी और रालोद के अध्यक्ष अजित सिंह से मुलाकात कर उन्हें सपा के रजत जयंती कार्यक्रम का न्योता देरक आए थे। 


यह कवायद बताती है कि सपा गठबंधन की ओर बढ़ रही है। अखिलेश भी इसको नेता जी के पाले में डाल चुके हैं। राहुल कह चुके हैं कि अगर चेहरा अखिलेश हों तो कांग्रेस तैयार है। फिलहाल पूरी सपा दो भागों में साफ-साफ बंटी दिख रही है। सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए लोहियावादी और चरणसिंहवादी जरूर एकजुट हो रहे हैं, लेकिन, कांग्रेस के  रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सपा मुखिया मुलायम से मुलाकात कर समान विचारों वाले दलों के गठबंधन की खबरों को हवा दे दी है। अब इसमें से पककर जो कुछ निकलेगा वहीं सपा का आगे का भविष्‍य तय करेगा।


 

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