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Finance | 2-Jan-2017 05:09:54 PM
दिसंबर 2016 में उत्पादन में भारी गिरावट

  • नोटबंदी का असर: विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट
  • आठ साल में भारत को पहली बार इतना नुकसान



 

दि राइजिंग न्‍यूज

02 जनवरी,नई दिल्‍ली।

आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नोटबंदी के एलान के बाद दिसंबर 2016 में भारत में विनिर्माण उद्योग में गिरावट दर्ज की गई है। एक मासिक सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि देश में पहली बार किसी महीने में मांग और उत्पादन के लिहाज से गदर्ज हुई है।

दिसंबर 2016 में द निक्केई/मार्किट मैन्यूफैक्चरिंग परचेजिंग सैनेजर्स इंडेक्स INPMI=ECI 49.6 दर्ज किया गया जो पिछले महीने यानी नवंबर 2016 में 52.3 था। दिसंबर 2015 के बाद यह पहला मौका है जब यह इंडेक्स 50 से नीचे पहुंचा है।

मासिक गिरावट के लिहाज से भी यह नवंबर 2008 के मुकाबले सबसे बड़ी गिरावट है। उस वक्त वैश्विक मंदी और लेहमन ब्रदर्स के आर्थिक संकट की वजह से इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।

सर्वे करने वाली कंपनी आईएचएस मार्किट के अर्थशास्त्री पॉलीना डि लीमा ने कहा कि नवंबर में बाजार से अचानक 500 और 1000 रुपये के नोट के विमुद्रीकरण की वजह से भारत का विनिर्माण उद्योग साल के आखिर तक सिकुड़ गया।

उन्होंने कहा कि बाजार में पैसे की कमी की वजह से न तो बाजार को नई मांग मिली और न ही पुराने उत्पादन की सप्लाई हो सकी। करीब दो महीने तक लगातार ऐसा होते रहने से साल 2016 के आखिर तक मैन्यूफैक्रिंग इंडस्ट्री रिकॉर्ड स्तर पर जा सिकुड़ी। नतीजतन इंडेक्स साल के सबसे कम 49 दर्ज हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री को घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों से कम ऑर्डर प्राप्त हुए। इस वजह से भी इंडेक्स निचले स्तर पहुंचा। सर्वे में इसके अलावा लोगों की परचेजिंग कैपसिटीघटता रोजगार और गिरती अर्थ व्यवस्था को भी निर्माण उद्योग में गिरावट की वजह बताया गया है।

गौरतलब है कि आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रात 8 बजे नोटबंदी का एलान करते हुए 500 और 1000 रुपये के पुराने करेंसी नोटों को प्रचलन से बाहर कर दिया था। इसके अलावा बैंकों से नकद निकासी पर भी सीमा तय कर दी थी।

इससे बाजार में कैश की किल्लत हो गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने 50दिनों तक लोगों को परेशानी होने की बात कही थी लेकिन विमुद्रीकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाने और 50 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। अभी भी लोग कैश की कमी से परेशान हैं।

 

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