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Events Lucknow | 25-May-2016 12:09:50 PM
‘विरोध’ को जन्‍म देता है युव‍कों का भटकाव


 

दि राइजिंग न्‍यूज


25 मई, लखनऊ।

-नाटक के माध्‍यम से आरक्षण व राजनीति पर उठाए सवाल


युवाओं का मन भी बालक की तरह होता है। उन्‍हें जिस काम के लिए मना करो वह वहीं करना चाहते हैं। ऐसे में उनका यह जिद्दीपन उन्‍हें जिंदगी के सफर में भटका कर गलत रास्‍ते पर ले जाता है जिसका एक समय पर उन्‍हें भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में वह बेवजह विरोध भी करते हैं। उन्‍हें यह भी नहीं मालूम होता कि यह विरोध सही है या गलत। उन्‍हें तो बस विरोध जताना है। ऐसा ही कुछ प्रेम साइमन द्वारा रचित नाटक विरोध में भी दिखाया गया है। इप्‍टा के 73वें स्‍थापना दिवस के अवसर पर कार्यालय में नाटक का मंचन किया गया।


आरक्षण पर भी किया कटाक्ष

नाटक में दिखाया गया कि आरक्षण के नाम पर किसी को ठगा जा रहा है तो कोई इससे लाभान्वित हो रहा है ऐसे में एक पक्ष जो कि युवा है वह इसका विरोध कर रहा है। वहीं दूसरी ओर कुछ युवा ऐसे हैं जो कि नेता के खिलाफ पहले तो नारे लगाते हैं और बाद में उन्‍हीं की शरण में चले जाते हैं। अपने फायदे के लिए वह उस विरोध को भूल जाते हैं जिसको वह ये कहकर कर रहे थे कि यह जनता के साथ अन्‍याय है अत्‍याचार है। वहीं लड़की देखकर उसे छेड़ना और फब्तियां कसना उनका शौक है। युवती के विरोध करने पर वह भड़क जाते हैं। युवती का विरोध उन्‍हें खराब लगता है जिसका वह बदला लेना चाहते हैं। ऐसे में इस नाटक में विरोध के कई रूपों को उजागर करने का प्रयास किया गया है। नाटक का निर्देशन इच्‍छा शंकर ने किया है। मुख्‍य पात्रों में निखिल जायसवाल,शेखर भारती, अखिलेश गुप्‍ता, आदित्‍य्‍ ओहरी, दीपक, हिमांशी, हारिस सिद्दीकी, दिनेश लोधी, उत्‍कर्ष, ॠषभ, रंजना थे।


शायरी के माध्‍यम से पानी बचाने का दिया संदेश

नाटक देखने आए लोगों का मनोरंजन करने के लिए इस मौके पर नाटक से पूर्व ओम प्रकाश ने शायरी के नजाराने छेड़े। शायरी का लुत्‍फॅ उठाने वाले लोगों को इस शायर ने अपनी नज्‍म के माध्‍यम से पानी बचाने का संदेश भी दे डाला। उन्‍होंने कुछ यूं फरमाया कि वो टुल्‍लू से अपनी छतें धोते रहे। और हमारी प्‍यास को पानी के लाले पड़ गए।

 

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