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Events Lucknow | 25-May-2016 12:13:21 PM
‘भीतरी दीवारें’ नाट्य मंचन से दिया परिवार में बना रहे समभाव का संदेश


 

दि राइजिंग न्‍यूज

25 मई, लखनऊ।



घर का बैठक कक्ष जिसमें एक तरफ तख्‍त व दूसरी तरफ कुछ कुर्सियां पड़ी हैं। मध्‍यम वर्गीय इस परिवार में सभी एकता के सूत्र में बंधे रहते हैं लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां उत्‍पन्‍न होती हैं कि परिवार टूट जाता है लेकिन तभी एक लड़की के प्रयासों से परिवार फिर से प्रेम सूत्र में बंध जाता है। ऐसा ही कुछ भीतरी दीवारें नाटक में दिखाने का प्रयास किया गया है। जिसका मंचन मंगलवार को कैसरबाग के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में किया गया था।


कथानक

नाना का प्रवेश होता है। इस मध्‍यम वर्गीय परिवार में नाना के साथ उनकी पत्‍नी और तीन बेटे हैं। नाना नौकरी छोड़कर घर में ही प्रूफ जांचने का काम करते हैं। छोटा बेटा दत्‍तू उनका सहयोग करता है। दो बड़े बेटे नौकरी करते हैं। सदाशिव सबसे बड़ा है मां पार्वती ने उसके लिए लड़की देखी थी उसने कहा था कि वह उनकी पसंद से शादी करेगा। पार्वती एक दिन उस लड़की जिसका नाम शालिनी है को घर बुलाती है और बेटे सदाशिव से शादी की बात चलाती है। लेकिन बेटा शादी से मना कर देता है और अपनी मर्जी से मंदा नाम की लड़की से विवाह कर लेता है। इससे घर वाले नाराज हो जाते हैं और दोनों को आशीर्वाद देने से मना कर देते हैं। तभी एक दिन शालिनी में मन में विचार आता है कि इस टूटे परिवार को एक सूत्र में फिर से पिरोना चाहिए तब वह सदाशिव को झूठा प्रेम पत्र लिखती है जो कि मंदा के हाथ लग जाता है। इससे शालिनी पार्वती और उसके परिवार की नजरों में गिरने का ढोंग करती है। वह इसमें कामयाब हो जाती है। बाद में वह बताती है कि उसने इस परिवार को प्रेम सूत्र में बांधने का एक प्रयास किया। अंत में शालिनी घर को छोड़कर चली जाती है। इसी के साथ नाटक का समापन हो जाता है।


नाटक भीतरी दीवारें के लेखक विजय तेंदुलकर ने परिवार को एक प्रेम सूत्र में बांधे रखने का संदेश दिया है। नाटक का निर्देशन आनंद प्रकाश शर्मा द्वारा किया गया। नाटक में मुख्‍य पात्र तारिक इकबाल, अचला बोस, अशोक लाल, ध्रुव सिंह,दीपिका श्रीवास्‍तव, श्रद्धा बोस व ॠषभ तिवारी थे। इस मौके पर महापौर दिनेश शर्मा भी मौजूद रहे जिन्‍होंने नाटक के पात्रों की प्रशंसा की।   

 

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