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Ladies Special | 29-Aug-2016 12:54:29 PM
बाकी न रहें निशान



 


दि राइजिंग न्‍यूज

अचानक वजन बढऩे और घटने के कारण स्ट्रेच माक्र्स पड़ जाते हैं। सबसे ज्‍यादा प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं को यह शिकायत होती है। शुरू से थोड़ी सावधानी बरती जाए और अपनी डॉक्टर की सलाह मानें तो इससे बचा जा सकता है।


स्ट्रेच माक्र्स का अर्थ है- एकाएक त्वचा के फैलने और सिकुडऩे से उस पर पडऩे वाले निशान। वेट लिफ्टिंग या प्रेग्नेंसी के दौरान ये निशान पड सकते हैं। त्वचा की दो सतहें होती हैं। गर्भावस्था के दौरान वजन बढता है। त्वचा की बाहरी सतह तो खिंच जाती हैकिंतु आंतरिक त्वचा खिंचाव को लंबे समय तक नहीं सहन कर पाती और भीतर के टिशूज टूटने लगते हैं। इससे त्वचा पर गहरी लकीरें पडऩे लगती हैंजिन्हें स्ट्रेच माक्र्स कहा जाता हैजो आमतौर पर पेटकूल्होंजांघों या ब्रेस्ट पर गर्भावस्था या इसके बाद पड सकते हैं।


बॉडी बिल्डिंगवजन और उम्र बढऩे के साथ ये निशान पडऩे लगते हैं। किसी कारणवश स्किन ओवर स्ट्रेच हो जाए तो निशान पडऩे लगते हैं। वजन बढऩे-घटने से इलास्टिक फाइबर कम हो जाते हैं। प्रेग्नेंसी में पोषण की कमी व डिहाइड्रेशन के कारण ऐसा हो सकता है। हॉर्मोनल असंतुलन और रूखी त्वचा से भी ऐसा हो सकता है।


ताकि न पडें निशान

हाल ही में ए सी नील्सन इन्फोग्राफिक्स द्वारा दिल्लीमुंबईपुणेहैदराबादबंगलुरूचेन्नईअहमदाबादलखनऊलुधियानाजयपुर और चंडीगढ जैसे शहरों में युवा जोडों पर कराए गए सर्वे में 84 प्रतिशत स्त्रियों ने कहा कि वे स्ट्रेच मार्क से डरती हैं। हालांकि 66 प्रतिशत को लगता था कि इसका कोई इलाज नहीं है। 82 प्रतिशत पुरुष पत्नी के लिए स्ट्रेच माक्र्स कम करने वाली क्रीम्स खरीदते हैं। यानी स्ट्रेच मार्क सबको परेशान करते हैं।


कैसे बचें इनसेजानें -

1. प्रेग्नेंसी के दौरान कपडों की फिटिंग पर ध्यान दें। पेट के पास अधिक कसे कपडे न पहनें। ढीले-ढाले सूती वस्त्र पहनें।

2. शरीर को हाइड्रेट रखें। खूब पानी पिएं। इससे त्वचा नम रहती है।

3. प्रोटीन और विटमिन सी युक्त डाइट लें। डाइट में जिंकविटमिन एसी और ई शामिल करें। फैटी एसिड्स भी लें।

4. डॉक्टर की सलाह से व्यायाम करें।

5. हरी सब्जियां खाएं। इनमें प्रचुर मात्रा में आयरन होता हैजिससे निशान नहीं पड़ते।

6. कैफीन यानी ज्य़ादा चाय-कॉफी से बचें।

7. टोफूसोया मिल्कसेम या बींस का सेवन करें। इससे शरीर में कोलेजन का उत्पादन बढता है।

8. वजन संतुलित रखें।


घरेलू उपचार

1. विटमिन सी व ई युक्त पोषक डाइट लें। इससे कोशिका निर्माण की प्रक्रिया तेज होती है। डॉक्टर की सलाह से पेट के निचले हिस्से पर विटमिन ई युक्त तेल की मालिश करें।

2. जैतून तेल की कुछ बूंदों के साथ पांच बूंदें लैवेंडर तेल की मिला कर मालिश करें।

3. दो चम्मच बादाम तेल में एक चम्मच वीट जर्म तेल मिलाएं और उसमें पांच बूंदें रोज और मेहंदी ऑयल डालें। इस मिश्रण से 15-20 मिनट नियमित मालिश करें।

4. खुबानी (ऐप्रीकोट) को लैवेंडर के तेल के साथ मिला कर मालिश करें।

5. तीन चम्मच जोजोबा, 10 बूंदें पचौली और पांच बूंदें लैवेंडर तेल की मिलाएं और 15 मिनट मालिश करें।

6. दस बूंदें मेहंदी और दो चम्मच बादाम का तेल मिला कर हलके हाथों से निशानों पर मलेंजब तक कि तेल सूख न जाए।

7. खुबानी या अखरोट वाले स्क्रब रगडऩे से भी निशान कम होते हैं।

8. संतरे व नीबू के छिलकों को सुखा कर बारीक पीसें। दो चम्मच मिश्रण में एक चम्मच बादाम पाउडर व गुलाबजल की बूंदें मिला कर उबटन तैयार करें। इसे 15 मिनट तक निशान पर लगाएं और फिर धो लें।


अन्य उपाय

स्ट्रेच माक्र्स में डर्मा रोलर्स भी उपयोगी हैंलेकिन इनके प्रयोग में हाइजीन का ध्यान रखना चाहिए। कूल्होंपेट के निचले हिस्से और जांघों पर जमा अतिरिक्त चर्बी को टमी टक की मदद से भी ठीक किया जा सकता है। सर्जिकल प्रक्रिया भी प्रभावकारी है।

 

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