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कानून व्यवस्था में सुधार जरूरी: रामनाईक

  • मुख्यमंत्री अच्छे इंसान, विकास के रास्ते पर ले जाने की है अच्छी सोच
  • संघ से ही मिली देश भक्ति तथा समाज सेवा करने की प्रेरणा



 


दि राइजिंग न्‍यूज ब्‍यूरो

कमल दुबे

31 जुलाई, लखनऊ।

राजनेता से राज्यपाल बने रामनाईक ने अपने 37 साल की राजनीतिक पारी में अनेक कीर्तिमान रचे हैंं। चाहे संसद में वंदे मातरम् का गान हो या सांसद निधि शुरू कराने की बात हो या फिर विदेशी बेबी मिल्क पैक पर मां का दूध ही बच्चों के लिए श्रेष्ठ लिखे जाने की अनिवार्यता। इसे लागू कराने का श्रेय 82 साल के इस तजुर्बेकार नेता को जाता है। इन्होंने राज्यपाल के रूप में दो साल के कार्यकाल के दौरान यूपी में लोकप्रियता की नई इबारत लिखी है। कभी सरकार के पारित विधेयक पर विवादों के चलते तो कभी अपने कामकाज को लेकर श्री नाईक ने यूपी में खूब सुर्खियां बटोरीं हैं। निजी रिश्‍तों में अत्यंत सरल राज्यपाल राम नाईक पर राजभवन से संघ का एजेंडा चलाने जैसा गंभीर आरोप भी लगा है। इन सबके बावजूद उन्होंने हर मौके पर संयम बनाए रखा और किसी तरह के दबाव में आए बिना अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का बेधड़क निर्वहन किया। सरकार के कामकाज पर अकसर उंगली उठाने तथा अपने सुझाव रखने वाले राम नाईक निजी रिश्तों में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की खुलकर तारीफ करते हैं तथा कानून व्यवस्था में अभी और बहुत कुछ सुधार की बात कहते हैं। राज्यपाल राम नाईक ने दि राइजिंग न्यूज के साथ डेढ़ घंटे से ज्यादा की खास मुलाकात में अपने कामकाज के अनुभव को खुलकर साझा किया।


यूपी के बारे में आपका अब तक का अनुभव कैसा रहा ?

82 साल की उम्र में यूपी में दो साल कैसे गुजरे पता ही नहीं चला। काम करता गया। 1978 में पहली बार विधायक चुना गया और पांच बार सांसद व मंत्री पद पर रहा। पद पर रहा या नहीं लेकिन पिछले 37 साल से जनता के हित में कार्य करता आ रहा हूं। जो भी काम करता रहा उसका साल भर का लेखा-जोखा जनता के सामने रखता हूं। यहां के लोगों से बहुत प्यार मिला।


आप तो महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्य से हैं। महाराष्‍ट्र की तरह यूपी को भी आगे ले जाने के लिए क्या होना चाहिए ?

अब तो मैं यूपी का हूं तो यहीं के बारे में ज्यादा सोचता हूं पर महाराष्ट्र के लोगों की बहुत याद आती है। मुम्बई में उत्तर भारतीयों की बड़ी संख्या है। यहां से लोग वहां जाकर कड़ी मेहनत करके आगे बढ़ रहे हैं। कोई केला बेचता है, तो कोई मछली, तो कोई बिल्डर है। लोग बड़ी संख्या में नौकरी के लिए जाते हैं। यहां पर रोजगार के अवसर पैदा किए जाने की बहुत जरूरत है। अगर यहां पर लोग उतनी ही मेहनत करना शुरू कर दें तो निश्चित रूप यूपी काफी आगे जाएगा।


पिछले दो साल में राजभवन और सरकार में खूब टकराव हुआ। सरकार के विधेयकों की मंजूरी, लोकायुक्त की नियुक्ति तथा विधान परिषद के नामित सदस्यों का विवाद के पीछे की वजह क्या रही ?

सरकार के साथ मेरा न तो कभी टकराव था और न अब है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बहुत अच्छे इंसान है और प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जाने की अच्छी सोच रखते हैं। सरकार और उनके साथ मेरे सम्बंध बहुत मधुर हैं। जहां तक विधेयकों को लेकर बात है तो संवैधानिक व्यवस्था का पूरी तरह पालन कराना राज्यपाल का दायित्व है। इन्हीं दायित्वों का मेरे द्वारा निर्वहन किया गया। अगर कोई राजनीतिक आरोप लगाता है तो उस पर टिप्पणी करना मेरे पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।


यूपी की कानून-व्यवस्था पर आप अकसर सवाल खड़े करते आए हैं। आपकी नजर में वर्तमान में कानून-व्यवस्था कैसी है ?

कानून-व्यवस्था ठीक न होने के कई कारण है। आप चाहेंगे कानून-व्यवस्था खराब है तो यह मैं कभी नहीं कहूंगा। अलबत्ता जो कानून-व्यवस्था की स्थिति है उसमें सुधार की जरूरत है।


तब फिर मथुरा की घटना को आप क्या कहेंगे ?

मथुरा की घटना जमीन के अतिक्रमण से जुड़ी है। यूपी में अधिकतर झगड़ों के पीछे जमीनी कब्जे का विवाद है। मैने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि सभी जिलों का सर्वेक्षण कराके जमीन पर कहां-कहां अवैध कब्जे हैं पता लगाएं और फिर इस पर श्वेत पत्र जारी करें ताकि असली बीमारी सामने आ सके।


आप यूपी के ऐसे गर्वनरों में है जो आम जनता में काफी लोकप्रिय हुए। आम जनता के लिए राजभवन के दरवाजे खोलना उनके बीच जाना तथा आयोजनों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने पर सपा की तरफ से सवाल उठे। आप कुछ कहना चाहेंगे।


लोगों के बुलाने पर मैं जाता हूं। मेरी इस भूमिका में किसी को कोई दिक्कत है तो परवाह नहीं। जनता के बीच घूमने पर ही वास्तविकता का पता चलता है। मैं राजनीति से हूं और हमेशा जनता के बीच रहा। हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि पहले के गवर्नर ऐसे नहीं थे। मैं बताना चाहता हूं कि पहले के कई गर्वनर ब्यूरोक्रेट थे और उनका काम करने का अपना तरीका था। इसके लिए पहले के राज्यपालों को मै कतई दोषी नहीं मानता।


आप पर राजभवन से संघ का एजेंडा चलाने का गंभीर आरोप सपा सरकार के एक मंत्री की तरफ से लगाया गया ?

देखिए मैं पहले ही कह चुका हूं कि, राजनीतिक आरोपों पर मेरा बोलना ठीक नहीं हैं। यह राजनीतिक आरोप हैं और इस विवाद में जाना पद की गरिमा के अनुरूप नहीं। फिर भी अगर संघ का एजेंडा चलाने की बात है तो मै स्पष्ट करना चाहूंगा कि संघ से जुड़ा रहा हूं और वहीं से मुझे देश भक्ति तथा समाज सेवा करने की प्रेरणा मिली है। कोई बताए इसमें गलत बात क्या है। सरस्वती शिशु मंदिर के आयोजन में जाने पर मुझ पर यह आरोप लगा था। मैं तो समाजवादी द्वारा आयोजित लोहिया जयंती के कार्यक्रम में गया था। इससे क्या मैं सपाई हो गया। राज्यपाल होने के नाते मैं सभी का हूं और लोग मुझे बुलाते हैं तो मैं चला जाता हूं।


अब तक के कार्यकाल में ऐसी कौन सी बातें हैं जो बहुत खराब लगी और दिल को बहुत तकलीफ पहुंची हो।

एमबी क्लब में सेना के एक आयोजन में धार्मिक परिधान के चलते मुस्लिम धर्म गुरु को प्रवेश न दिया जाना बहुत खराब लगा। उन्हें आयोजन का न्यौता गया था लेकिन ड्रेस कोड में न होने के कारण प्रवेश ‍नहीं दिया गया। मेरे द्वारा पूछे जाने पर नियमों का हवाला‍ दिया गया। जिस पर मैंने नियम बदलने के लिए केन्द्र को पत्र भी लिख रखा है। इसके अलावा लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर हुआ विवाद भी ठीक नहीं था।


राजनीति में लगातार गिरावट आई है। हर कोई किसी को कुछ भी कह जाता है। दयाशंकर सिंह तथा बसपा में अपशब्दों की घटना ताजा उदाहरण है। इस पर नियंत्रण के लिए कोई सुझाव देना चाहेंगे।

संसद हो या विधानसभा। इनके प्रतिनिधियों में गिरावट आई है। इसे पीढ़ियों का बदलाव भी कह सकते हैं लेकिन यह सच है कि गिरावट आई है। राजनीति का स्तर नीचे जा रहा है। मेरी सलाह है कि भाषा पर सभी को संयम रखना चाहिए। संयम रखने में बड़ी ताकत होती है।


आप 82 साल के उम्र में भी बहुत एक्टिव है तथा कैंसर जैसी बीमारी से जंग जीती है। अपनी सेहत का राज क्या लोगों से साझा करना चाहेंगे।

क्यों नहीं, बहुत अच्छा सवाल है। नियमित सूर्य नमस्कार तथा अच्छे विचार व सादा आहार। महाराष्ट्र के मात्र डेढ़ हजार की आबादी वाले गांव में मैं पैदा हुआ था और मेरे पिताजी अध्यापक थे। उस गांव का राजा सूर्य नमस्कार करता था। मैं बचपन से प्रतिदिन 25 बार सूर्य नमस्कार करता आ रहा हूं तथा सादा आहार लेता हूं। रात साढ़े ग्यारह बजे सोकर सुबह साढ़े पांच बजे उठता हूं और कभी बुरे विचार मन में नहीं लाता। यही मेरी ऊर्जा का रहस्य है।


क्या फिर सक्रिय राजनीति में आने के बारे में सोचा है।

मुझे पांच साल के लिए राज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी संभालने का काम दिया गया है। जिसे निभाते दो साल बीत चुके हैं। अभी तीन साल बचे हैं। उसके बाद आगे के बारे में सोचूंगा जिससे समाज को कुछ दे सकूं। 

 

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