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मोदी के एजेंडे में राम की जगह अमेरिका : शंकराचार्य

  • स्‍वामी निश्चलानंद ने कहा, सरकार को वैदिक संस्कृति की कद्र नहीं
  • श्रीगोवर्धन मठ पुरी के शंकराचार्य का मोदी सरकार पर करारा प्रहार



 

दि राइजिंग न्यूज

श्री गोवर्धनमठ पुरी के जगद्‌गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती राजधानी में बहुत नाराज थे। अपने विचार से भक्तों को सनातन धर्म की उपयोगिता समझा रहे थे। बोल उठे, वह चाहते हैं ‍कि लोग वैदिक संस्कृति की उपयोगिता को समझें। धर्म की जय करें और अधर्म का नाश। पर, अचानक गमगीन हो गए। बोला जिससे उम्‍मीद थी वह तो अमेरिका के पीछे भाग रहा है।

 

केन्‍द्र की आरएसएस सरकार को भी कोसा। नाराज मुद्रा में कहा कि वैदिक संस्कृति का कद्र नहीं करतीं मोदी सरकार। शंकराचार्य कांग्रेस पर भी बरसे। सभी पर भारतीय वेद व संस्कृति को नीचा दिखाने का आरोप लगाया। शंकराचार्य ने कहा 143 वें शंकराचार्य भारती कृष्णा ने वैदिक गणित को एक सूत्र में बांधा था। उन्होंने सिद्ध किया था कि गणित में गणना की दृष्टि से शून्य सबसे पहला अंक है।


इसी सूत्र के आधार पर और उनके विदेशी शिष्यों ने कम्प्यूटर को जन्म दिया। दुनिया वैदिक संस्कृति से परिवर्तन कर रही है और हम अमेरिका से मांग रहे हैं। इन्हीं सब सवालों को लेकर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने राइजिंग न्‍यूज के साथ बहुत खरी-खरी बात कही। संघ पर नाराज हुए मोदी सरकार को कोसा और भारत में धर्म की ढहती दशा पर चिंता जताई। प्रस्‍तुत है जगद गुरु शंकराचार्य से बातचीत के अंश-

 

विश्व में वैदिक संस्कृति की दशा व दिशा क्या है ?

हमारी वैदिक संस्कृति अरबों साल पुरानी है। जीवन जीने की कला वे‍द के जरिए निकलकर आई। हमारी संस्कृति ने दुनिया पर राज ‍किया और तब कोई समस्या नहीं थी। मूलत: जब मुगल आए और अंग्रेजों का शासन हुआ इसके बाद तो वैदिक संस्कृति खत्म ही हो गई। आज हम अपनी वैदिक संस्कृति का आधा हिस्सा भी ले लेते तो विश्व में ‍किसी प्रकार की समस्या नहीं रहती। विश्व में वैदिक संस्कृति का लोप होता जा रहा है। जबकि वेद दुनिया की सभी संस्कृतियों से ऊपर है और यह विश्व शक्ति बन सकती है, लेकिन हम पाश्चात्य की तरफ भाग रहे हैं जो वेद व वैदिक संस्कृति के लिए ठीक नही हैं। वेद विहीन समाज, वेद विहीन विज्ञान, वेद विहीन गणित की कल्पना नहीं की जा सकती है। हमें अपने वैदिक संस्कृति के सामर्थ्य को पहचानना होगा तभी हम विश्व गुरू बना पाएंगे। 

 

दुनिया वेद पर शोध कर रही है और हम विदेशी संस्कृति के पालनहार हो गए?

ठीक कहा। वेद पर कई विदेशी विद्वानों ने पुरी मठ में आकर शोध भी किया। वे शंकराचार्य की संगत में रहकर दुनिया में अपना नाम कमा रहे हैं और हम पिछलग्गू बने हुए हैं। अरे भाई हमारा अपना क्या है। सिर्फ वेद ही है न। अगर आगे बढ़ना है तो इसी के बलबूते आगे बढ़ सकते हैं। कहते हैं कि शून्य व एक का सिद्धांत और दशमलव का सिद्धांत शंकराचार्य ने दिया है। नीति व आध्यात्म के समन्वय पर आधारित शिक्षा से जीवन सार्थक होता है। ऐसा नहीं होने से जीवन भी दिशाहीन हो जाता है। हमारी शिक्षा पद्धति इसी पर आधारित होनी चाहिए 



क्या वैदिक गणित से पड़ी कंप्यूटर शिक्षा की नींव ?
 
हां बिल्कुल। आज हम जो दुनिया में कम्प्यूटर युग को देख रहे है उसकी आधारशिला भारत में ही रखी गई। स्वामी निश्चलानंद ने कहा ‍कि गोवर्धन पुरी के 143 वें शंकराचार्य स्वामी भारती कृष्णा ने वैदिक गणित विश्व को दिया। देश को पता ही नहीं। न तो सरकारें इसकी चिंता करतीं हैं और न तो पता है कि दुनिया में आज सबसे महत्वपूर्ण उपकरण की नींव भारत में पड़ी थी।

 

बता देते हैं कि भारत के वेदों से कम्प्यूटर आधारित शिक्षा की नींव रखी गई। इसमें वैदिक गणित में 16 सूत्र व 16 उप सूत्र है, जो गणित के सभी सवालों को सुलझाने में उपयोग लाए जाते हैं जो आज कंप्यूटर को प्रमुख बनाता है। असल में 143 वें शंकराचार्य के विदेशी शिष्यों ने शंकराचार्य से ‍शिक्षा ली थी। बाद में अपने देश चले गए और उन्हीं के सूत्र को आधार बनाकर विश्व का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण बना डाला। 


अयोध्‍या में राम मंदिर पर क्‍या कहेंगे अब तो मोदी जी प्रधानमंत्री...(बीच में)?

अरे वो क्‍या करेंगे। कुछ नहीं। मोदी को राम मंदिर से क्‍या लेना देना है। मोदी तो अयोध्‍या भी नहीं जाना चहते हैं। रामलीला में जय श्रीराम कहने भर से मंदिर नहीं बनेगा। मंदिर के लिए आस्‍था भी काम नहीं आएगी। बल्कि  मंदिर बनवाने के लिए प्रयत्‍न करना होगा। उस दिशा में न तो भाजपा की पहली सरकार ने काम किया न ही मोदी सरकार काम करेगी। मोदी को केवल अमेरिका दिख रहा है। अब अमेरिका ही मोदी के राम है अयोध्‍या के राम तो पुराने हो गए है उनको तो अब सारा जन्‍म टाट में ही रहना है।



आतंकवाद पर आप का क्या ख्याल है ?

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा ‍कि किसी भी दुष्ट के साथ उदारता दिखाना ठीक नहीं है। जहां तक आतंकवाद  का प्रश्न है तो आतंकवादी का एक ही लक्ष्य होता है और वह है अराजकता फैलाना, लोगों को मारना, खून बहाना। इसलिए उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब देना भी आवश्यक है। जिससे देश व सीमा की रक्षा हो सके और वे अपने मकसद में कामयाब न हों। 



जीवन में गीता को किस रूप में देखते हैं ?

स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि गीता व महाभारत जीवन को दिशा देने का काम करते हैं। गीता के एक एक प्रसंग को ध्यान से पढ़ना चाहिए। जीविका जीवन के लिए हो, जीवन जीविका के लिए नहीं। महाभारत में भीष्म पितामह के कथन के आधार पर बताया कि शिक्षण संस्थाएं वेद के बीच सामंजस्य बनाकर चले तो बेहतर शिक्षा बच्चों को दी जा सकती है।

 

आज के परिपेक्ष्य में वर्ण व्यवस्था को कितना सही मानते हैं ?

देखिये वर्ण व्यवस्था भी शरीर के विभिन्न भाग की तरह होती है। शरीर का संचालन करने के लिए सभी भागों का होना जरूरी है। उसी प्रकार अपनी वेद ने सिर्फ परम्परा के ही अनुसार नहीं बल्कि व्यवस्था के अनुसार वर्ण व्यवस्था समाज को दिया। लेकिन समय के साथ लोगों ने इसका दुरुपयोग किया। एक व्यवस्था चलाने के लिए जरूरी है नहीं तो दुर्बल लोग और दुर्बल होते जाएंगे। इसलिए सनातनी व्यवस्था के हिसाब से चले तो कोई परेशानी नहीं होगी।

 

आज राजनीति के दौर में वर्ण व्‍यवस्‍था के आधार पर बवाल हो रहे ?

अरे भाई, आज की राजनीति है क्‍या। पैसे वालों और दुष्‍ट दानवों की फौज अपनी पताका फहरा रही है। उसको समाज, समाज परिवर्तन और विषमता से कुछ लेना देना नहीं है। अगर ऐसा होता तो उनको ज्ञात होता कि, जाति प्रणाली कभी भारत की देन नहीं रही है। भारत कर्म आधारित व्‍यवस्‍था पर धर्म के आघार पर आगे बढ़ा है। वर्तमान पीढ़ी को ज्ञात नहीं है कर्म का वर्ण से कोइ्र मेलजोल नहीं हैं। जाति को केवल वोट के लिए प्रयोग किया जा रहा है। कहां है जाति व्‍यवव्‍स्‍था। कोई एक आदमी ब्राम्‍हण, दलित में भेद करे तो सारा भारत उसका अनुसरण नहीं करताहै। जातिभारतीय राजनीतिकी सडांध से पैदा व्‍यवस्‍था है।


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