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एक देश जो पैसे देकर खरीदता है कचरा

  • जानिए क्यों पैसे देकर कचरा खरीद रहा स्‍वीडन
  • कूड़े को जलाकर राष्ट्रीय हीटिंग नेटवर्क का निमार्ण



 

दि राइजिंग न्‍यूज

कूड़े की समस्या से निपटारा पाने के लिए भारत में चिंतन चलता रहता है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इस समस्या से निजात पाने के लिए बड़े-बड़े वादे और दावे करती हैं। लेकिन सच यह है कि जमीन पर कुछ खास नजर नहीं आता है। अदालतों की फटकार सुनने के बाद सरकार कार्रवाई की बात करती है। लेकिन, नतीजा किसी से छिपा नहीं है। वहीं दुनिया का एक ऐसा देश भी है जहां कूड़े की कमी चल रही है। यह बता देना भी जरूरी है कि दुनिया भर 10 टॉप के कैशलेस अर्थव्यवस्था वाले देशों में कूड़ा खरीदने वाला यह देश चौथे स्थान पर है।

 

स्वीडन में कूड़े की कमी

स्वीडन में इन दिनों कूड़े की कमी चल रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए वह दूसरे देशों से कूड़ा खरीदकर बिजली पैदा करने की जरूरत पूरी कर रहा है। पर्यावरण का ख्याल रखने में दुनिया के अग्रणी देशों मे स्वीडन का शुमार है। वह कूड़े का आयात अपने स्टेट ऑफ द आर्ट प्लांट को चालू रखने के लिए कर रहा है। दरअसल यहां ज्यादा ठंड पड़ने के दौरान कूड़े को जलाकर राष्ट्रीय हीटिंग नेटवर्क के लिए इस्तेमाल की जाती है, जिससे अत्यधिक ठंड में यहां के घरों का तापमान रहने के अनुकूल रखा जा सके।

 

 

कूड़े का हो रहा है आयात

स्वीडन में ऐसा सिस्टम बनाया गया है, जिससे ठंड के दिनों में एक ही प्लांट सैकड़ों घरों का तापमान एक साथ बढ़ाने का काम कर सके। बड़े-बड़े पाइपलाइन से उष्मा (हीट) को घरों तक पहुंचाया जाता है। हीट पैदा करने के लिए कूडे़ का इस्तेमाल किया जाता है। स्वीडन सरकार ने ऐसी नीति बना रखी है, जिसके तहस ठंड के दिनों में यहां की प्राइवेट कंपनियों को भी वेस्ट और जलने वाला कूड़े का आयात करना होता है। स्वीडन अपने देश का कूड़ा जमीन में न के बराबर ही दबाता है।

 

 

99 फीसद कूड़े का इस्तेमाल

पिछले साल उसके सिर्फ 1 प्रतिशत कूड़े को ही जमीन में दबाया और बाकी के कूड़े को अपनी ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में लगाया। स्वीडन दुनिया का पहला ऐसा देश है, जिसने जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) के आयात पर 1991 में सबसे ज्यादा टैक्स लगाए। यहां ऊर्जा की जरूरतों के लिए ज्यादातर प्रयोग ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों से होता है।

 

 

स्वीडिश मैनेजमेंट री-साइकलिंग का तर्क

स्वीडिश मैनेजमेंट रीसाइकलिंग असोसिएशन की निदेशक ऐना कैरिन ग्रिपवाल के मुताबिक, उनकी संस्था ने लोगों को सालों से इस बात को लेकर प्रेरित किया कि वे ऐसी चीजों को कतई बाहर न फेकें, जो रिसाइकल या रीयूज हो सकें। स्वीडिश लोग प्राकृति के तौर-तरीकों में रहना और पर्यावरण के प्रति खासे जागरूक रहते हैं। इसी के आधार पर हीटिंग के लिए हमने इस डिस्ट्रिक्ट नेटवर्क को तैयार किया है।

 

 

यूरोप में चिमनी का प्रयोग

यूरोप के दक्षिणी हिस्से में लोग हमारी तरह इस प्रकार कूड़े का प्रयोग नहीं करते हैं। वे केवल चिमनी का इस्तेमाल करते हैं। हम जीवाश्म ईंधन के सब्सिट्यूट के रूप में कूड़े का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूरोपियन यूनियन के देशों में कूड़े को जमीन में दबाने पर प्रतिबंध है, तो कूड़े के निदान के लिए जुर्माना भरने से अच्छा है कि वह इसे हमें सेवा के रूप में दे दें।



रिसाइक्लिड होने वाली चीजों से नवीकरण ऊर्जा

इतना ही नहीं स्‍वीडन ने रिसाइक्लिड होने वाली चीजों से नवीकरण ऊर्जा तैयार करने के लिए राष्ट्रीय पुनर्चक्रण नीति को भी लागू किया हुआ है। इससे वहां की निजी कंपनियों को दूसरे देशों से अधिक से अधिक कचरों के आयात करने और उसे जलाने का अधिकार भी मिला हुआ है। कचरों से बनने वाली नवीकरण ऊर्जा का उपयोग राष्ट्रीय ऊष्मा तंत्र में प्रयोग किया जाता है। इसका इस्तेमाल अत्यधिक ठंड के समय घरों को गर्म करने के लिए किया जाता है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि स्वीडन के निवासियों में घरों से निकलने वाले कचरों को पुनर्चक्रण के लिए संरक्षित करने की प्रवृत्ति वर्षों तक चलाए गए जागरुकता अभियान के तहत पैदा हुई है।

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