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राजधानी में सरकारी जमीनों की खुलेआम लूट

  • गार्डन लीज ही नहीं फुटपाथ भी खा रहे हैं दुकानदार
  • सुभाष मार्ग, चौक और यहियागंज में अवैध कब्‍जा


ये देखकर सारा मामला क्लियर हो जाता है।

 

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

28 दिसंबर, लखनऊ।

मिसाल है, चौकीदार ही चोर हो तो फिर सुरक्षा ही कहां। लखनऊ विकास प्राधिकरण में यही खेल चल रहा है। अभियंताओं की शह पर राजधानी के व्यस्ततम क्षेत्रों में बेशकीमती जमीनों की खुली लूट चल रही है। केवल सुविधा शुल्क लेकर सरकारी जमीनों पर खुलेआम कब्जा कराया जा रहा है। यह कारनामा पुराने शहर में तो मुख्य मार्गों पर ही चल रहा है। सवाल यह है कि एक तरफ यातायात सुधार व अतिक्रमण को लेकर न्यायालय सख्त रुख अख्तियार किए हैं तो दूसरी तरफ प्राधिकरण के अधिकारी-अभियंता अपनी जेब भर रहे हैं।

 

दरअसल पुराने शहर में विक्टोरिया स्ट्रीट, सुभाष मार्ग, नादान महल रोड, पांडेयगंज आदि इलाकों सड़क के दोनों तरफ गार्डन लीज की जमीन छोड़ी गई थी। मकसद यह था कि भविष्य में कभी सड़क चौड़ी करनी हो तो इस जमीन का इस्तेमाल किया जा सकें। मगर जिम्मेदार महकमों व प्रशासन की अनदेखी और भ्रष्टाचार के चलते इस जमीन को कारोबारी हड़प गए। पहले गार्डन लीज की जमीन को चारदिवारी बनाकर घेरा गया, फिर पक्का निर्माण कर लिया गया। उसके बाद इस गार्डन लीजिए की जमीन पर बड़े बड़े अपार्टमेंट खड़े होने लगे। यह सिलसिला पूरे पुराने शहर में धड़ल्ले से चल रहा है।

 

एक दर्जन से ज्यादा निर्माण

लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता अजय कुमार सिंह के मुताबिक अवैध निर्माण की लगातार निगरानी की जाती है। जो निर्माण मानक के अनुरूप नहीं होते, उन्हें नोटिस जारी किए जाते हैं। मगर उनके दावे चाहे जो हों लेकिन सुभाष मार्ग पर हवाई जहाज कोठी के ठीक सामने फुटपाथ पर कब्जा करके अपार्टनमेंट धड़ल्ले से बन रहे हैं। इसी तरह से यहियागंज में सिद्धनाथ मंदिर के अगल-बगल कई अपार्टमेंट बन रहे हैं। कई ऐसे हैं जो नोटिस मिलने के बाद भी पूरे हो गए।

 

उनका भ्रष्टाचार, इन पर अत्याचार

पुराने शहर के तमाम इलाके सघन आबादी वाले हैं। प्राधिकरण अभियंताओं के भ्रष्टाचार के चलते घनी आबादी में बनने वाले अपार्टमेंट से आसपास स्थित घरों में हवा पानी आना तक बंद हो जाता है। लेकिन दबंग बिल्डरों और भ्रष्ट अधिकारियों के चलते कभी इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। नतीजा यह है इस तरह के निर्माण धड़ल्ले से हो रहे हैं।

 

423 निर्माणों की सूची

लखनऊ विकास प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक राजधानी मे 423 भवनों को नोटिस जारी किया जा चुका है। इनमें करीब पांच दर्जन के ध्वस्तीकरण के भी आदेश हैं। अगर इस तरह के निर्माण हो रहे हैं तो संबंधित क्षेत्र के अभियंताओं से रिपोर्ट मांगकर कार्रवाई की जाएगी।

 

अभियंताओं को अपने क्षेत्र अवैध निर्माण चिन्हित करने तथा उन्हें नोटिस जारी कर काम रुकवाने के आदेश दिए हैं। अगर इसमें कोताही हो रही है तो दोषी अभियंता को बख्शा नहीं जाएगा।

सत्येंद्र सिंह, उपाध्यक्ष - लखनऊ विकास प्राधिकरण 

 

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